वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की टीम अग्निपक्षा ने रेस2स्पेस 2026, यूके में विश्व स्तर पर 8वां स्थान हासिल किया

सीहोर: वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की छात्र-नेतृत्व वाली रॉकेटरी टीम, टीम अग्निपक्षा ने यूनाइटेड किंगडम में आयोजित रेस2स्पेस अंतरराष्ट्रीय प्रोपल्शन प्रतियोगिता 2026 में स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड रॉकेट इंजन का सफलतापूर्वक दो बार ‘हॉट फायर परीक्षण’ कर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। टीम ने ‘हाइब्रिड प्रोपल्शन श्रेणी में विश्व स्तर पर 8वां स्थान’ प्राप्त किया। यह उपलब्धि वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के साथ-साथ भारत में छात्र-नेतृत्व वाले अंतरिक्ष एवं रॉकेट प्रोपल्शन के बढ़ते पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रेस2स्पेस का चौथा संस्करण यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड द्वारा आयोजित किया गया और इसका आयोजन बकिंघमशायर स्थित वेस्टकॉट स्पेस क्लस्टर, वेस्टकॉट वेंचर पार्क में किया गया। यूके स्पेस एजेंसी और बकिंघमशायर के सहयोग से आयोजित वर्ष 2026 की इस प्रतियोगिता में 22 से अधिक देशों के लगभग 530 विद्यार्थियों वाली 75 टीमों ने भाग लिया। इनमें अमेरिका, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, नीदरलैंड्स और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों की टीमें शामिल थीं।

अत्यंत चुनौतीपूर्ण हाइब्रिड रॉकेट इंजन श्रेणी में कुल 49 टीमों ने प्रतिस्पर्धा की। टीम अग्निपक्षा ने प्रतियोगिता के दौरान आयोजित स्थल-आधारित परीक्षण और संगोष्ठी के चरण में अपने प्रोपल्शन सिस्टम के प्रदर्शन और विश्वसनीयता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।

रेस2स्पेस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की टीमों को अपने स्वयं के रॉकेट इंजन का डिजाइन, निर्माण और परीक्षण करना होता है। इसके माध्यम से उद्योग विशेषज्ञों के समक्ष टीमों की इंजीनियरिंग क्षमता, सुरक्षा तैयारियों और तकनीकी प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है।

हॉट-फायर परीक्षण के चरण तक पहुंचना अपने आप में एक महत्वपूर्ण तकनीकी और सुरक्षा उपलब्धि है, क्योंकि इंजन को प्रज्वलन से पहले कठोर डिजाइन, संरचनात्मक और परीक्षण सुविधा से संबंधित सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। रेस2स्पेस के आयोजकों ने टीम अग्निपक्षा द्वारा उसके हाइब्रिड रॉकेट इंजन के दो सफल हॉट-फायर परीक्षण पूरे करने की उपलब्धि को मान्यता दी।

इस उपलब्धि के पीछे प्रोजेक्ट हाइप (HyPE) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह लगभग 7 किलो न्यूटन श्रेणी का हाइब्रिड रॉकेट इंजन है, जिसे एयरोस्पेस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस सहित विभिन्न विषयों के लगभग 40 विद्यार्थियों ने मिलकर विकसित किया है। जुलाई 2025 में स्थापित टीम अग्निपक्षा ने कम समय में छोटे प्रोपल्शन सिस्टम्स के विकास से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की पेशेवर परीक्षण सुविधा में उन्नत हाइब्रिड रॉकेट इंजन के सफल प्रदर्शन तक की यात्रा पूरी की है।

वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतीश कुमार मोढ़ ने कहा, “टीम अग्निपक्षा का सफल अंतरराष्ट्रीय अभियान और हाइब्रिड रॉकेट टीमों के बीच विश्व स्तर पर 8वां स्थान हासिल करना वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता नवाचार, उन्नत शोध और छात्र-नेतृत्व वाले तकनीकी विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, यह हमारे विद्यार्थियों को वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती है।”

इस उपलब्धि पर वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में फैकल्टी एडवाइजर, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोग्राम चेयर, डॉ. प्रशांत गोपालकृष्णन ने कहा, “दो सफल हॉट-फायर परीक्षण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। टीम को यहां तक पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका केवल कागज पर सबसे महत्वाकांक्षी डिजाइन की नहीं, बल्कि डिजाइन को सरल रखने, उपलब्ध समय में जिन चीजों को सत्यापित किया जा सकता था उन्हें प्राथमिकता देने और अपनी निर्माण क्षमता के बारे में व्यावहारिक एवं ईमानदार दृष्टिकोण अपनाने की रही। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने टीम को अपनी महत्वाकांक्षा को वास्तविक उपलब्धि में बदलने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान किया।”

इंजन के डिजाइन को व्यापक इंजीनियरिंग सत्यापन प्रक्रिया से गुजारा गया। इसमें फाईनाइट एलिमेंट एनालिसिस के साथ-साथ चरणबद्ध योग्यता परीक्षण कार्यक्रम शामिल था, जिसमें कोल्ड-फ्लो परीक्षण, प्रूफ-प्रेशर परीक्षण और स्थैतिक अग्नि परीक्षण किए गए। इन सभी परीक्षणों के बाद टीम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए यूनाइटेड किंगडम रवाना हुई।

टीम अग्निपक्षा की इससे पहले की उपलब्धियों में एल-श्रेणी के ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर का सफल स्थैतिक अग्नि परीक्षण भी शामिल है, जिसमें अधिकतम 1,500 न्यूटन का थ्रस्ट दर्ज किया गया था। प्रोजेक्ट हाइप टीम की तकनीकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण छलांग है, जिसने प्रोपल्शन क्षमता में लगभग दस गुना वृद्धि के साथ ठोस ईंधन से हाइब्रिड रॉकेट प्रोपल्शन की दिशा में टीम के संक्रमण को दर्शाया है। टीम अग्निपक्षा के कप्तान श्रेयस हिरेगौदार ने कहा, “हमने इस रॉकेट इंजन को उपलब्ध संसाधनों के साथ उस समय बनाया, जब रुक जाने के कई कारण मौजूद थे। दुनिया भर की टीमों के साथ एक पेशेवर परीक्षण सुविधा में इसे दो बार सफलतापूर्वक फायर होते देखना उन सभी देर रात तक किए गए प्रयासों को सार्थक बनाता है।”

यह उपलब्धि वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के नवाचार, व्यावहारिक शोध और उन्नत तकनीकी विकास पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। साथ ही, यह एयरोस्पेस सहित विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों पर काम करने और वैश्विक मंच पर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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