रांची में पानी की टेंशन खत्म! हटिया-गोंदा-गेतलसूद डैम फुल, गर्मी में नहीं होगी जल संकट की चिंता

रांची
रांची में लगातार हुई बारिश का असर शहर के प्रमुख जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी के तीनों प्रमुख डैम हटिया, गोंदा और गेतलसूद में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। अच्छी बारिश के कारण जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है, जिससे अगले साल गर्मी के मौसम में शहरवासियों को पेयजल संकट से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
जल संसाधन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान जल भंडारण से अगले एक से दो साल तक शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सहारा मिल सकता है।
हटिया डैम का जलस्तर 37.01 फीट दर्ज किया गया है। डैम की अधिकतम जलधारण क्षमता 38 फीट है। यानी जलस्तर अपनी क्षमता से महज करीब एक फीट नीचे पहुंच चुका है। हटिया डैम से धुर्वा, एचईसी, एयरपोर्ट, रेलवे, तुपुदाना, सीआरपीएफ कैंप आदि क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में प्रतिदिन करीब 10 मिलियन गैलन पर डे (एमजीडी) पानी की आपूर्ति की जाती है।
वहीं, गोंदा डैम भी पूरी क्षमता के करीब पहुंच गया है। डैम का जलस्तर 28 फीट तक पहुंचने के बाद फाटक खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। फाटक खोलने के बाद जलस्तर घटकर 27.09 फीट हो गया। गोंदा डैम की अधिकतम क्षमता 28 फीट है। इस डैम से राजधानी के कई शहरी इलाकों में प्रतिदिन करीब पांच एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है।
गेतलसूद डैम में भी जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका जलस्तर 1932.30 आरएल फीट दर्ज किया गया, जबकि डैम का उच्चतम जलस्तर 1936 आरएल फीट है। गेतलसूद डैम राजधानी की सबसे बड़ी जलापूर्ति व्यवस्था का आधार है। इससे रुक्का जलशोधन केंद्र के माध्यम से रांची शहर के बड़े हिस्से में प्रतिदिन करीब 37 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जाती है।
गर्मी में नहीं सताएगी पानी की चिंता
पिछले वर्षों में गर्मी के दौरान डैमों का जलस्तर तेजी से नीचे जाने से शहर में जल संकट की स्थिति बनती रही है। लेकिन इस बार मानसून के दौरान अच्छी बारिश होने से तीनों प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है। इससे आने वाले गर्मी के महीनों में जलापूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
पेयजल विभाग के अभियंता प्रमुख निरंजन कुमार का कहना है कि जल संरक्षण और पाइपलाइन लीकेज को नियंत्रित करना भी जरूरी है, ताकि उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग किया जा सके। पर्याप्त जल भंडारण के बावजूद शहर में पानी की बर्बादी रोकना और नियमित आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बनी रहेगी। फिलहाल डैमों की स्थिति राजधानीवासियों के लिए राहत लेकर आई है।





