वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में आयोजित IBCD 2026 में आईं 262 प्रविष्टियां, 46 रिसर्च पेपर्स स्प्रिंजर (Springer) पब्लिकेशन के लिए स्वीकृत
दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में रिसर्चर्स और एकेडेमिशियंस ने बिजनेस इंटेलिजेंस, कम्प्यूटेशनल मैथमेटिक्स और डेटा एनालिटिक्स पर मंथन किया

सीहोर: वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में ‘बिजनेस इंटेलिजेंस, कम्प्यूटेशनल मैथमेटिक्स एंड डेटा एनालिटिक्स’ (IBCD 2026) पर दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में एकेडेमिशियंस, रिसर्चर्स, इंडस्ट्री प्रोफेशन्स और स्टूडेंट्स गणित, डेटा साइंस और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं के संगम पर हो रहे नए बदलावों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर एकत्र हुए।
स्कूल ऑफ एडवांस्ड साइंसेज एंड लैंग्वेजेस द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और शिक्षा मंत्रालय की पहल ‘इंसटीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल’ का सहयोग प्राप्त था। वहीं, स्प्रिंजर इस कार्यक्रम का पब्लिकेशन पार्टनर रहा।
कॉन्फ्रेंस में कुल 262 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें 212 रिसर्च पेपर सबमिशन और अवॉर्ड व केवल ओरल-प्रेजेंटेशन श्रेणी में 50 प्रविष्टियां शामिल थीं। पीयर-रिव्यू प्रक्रिया के बाद, स्प्रिंजर में पब्लिकेशन के लिए 46 रिसर्च पेपर्स को स्वीकार किया गया, जबकि ओरल, पोस्टर और अवॉर्ड सेशंस में कुल 70 पेपर्स प्रस्तुत किए गए।
यह आयोजन वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. जी. विश्वनाथन के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसे वाइस प्रेसिडेंट डॉ. शंकर विश्वनाथन, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट सुश्री कादंबरी एस. विश्वनाथन और ट्रस्टी सुश्री रमणी बालासुन्दरम का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
15 अक्टूबर को आयोजित उद्घाटन सेरेमनी में भारत सरकार के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के डायरेक्टर (टेक्नोलॉजी) श्री राज शेखर सिंह चीफ गेस्ट के रूप में शामिल हुए, जबकि श्री जी.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, इंदौर के डायरेक्टर प्रो. नीतेश पुरोहित गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे। सेशंस के दौरान वाइस चांसलर प्रो. सतीश कुमार मोढ़, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. टी. बी. श्रीधरन, रजिस्ट्रार डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्रा, डायरेक्टर-ऑपरेशन्स डॉ. प्रभाकर एस, डीन्स, डायरेक्टर्स, फैकल्टी मेंबर्स और स्टूडेंट्स मौजूद रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए चीफ गेस्ट श्री राज शेखर सिंह ने डिफेंस सेक्टर के लिए कॉन्फ्रेंस के विषयों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्टूडेंट्स से कभी भी सवाल पूछना बंद न करने का आह्वान करते हुए कहा कि इनोवेशन उन्हीं के हाथों में होता है जो कभी सवाल पूछना बंद नहीं करते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि असफलताएं अक्सर सफलता से ज्यादा सिखाती हैं।
उन्होंने कहा, “डेटा एनालिटिक्स और कम्प्यूटेशनल पद्धतियां भारत के राष्ट्रीय विकास और रणनीतिक तकनीकी क्षमताओं के लिए लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। जटिल जानकारियों का विश्लेषण करने, विश्वसनीय कम्प्यूटेशनल मॉडल विकसित करने और रिसर्च को व्यावहारिक समाधानों में बदलने की क्षमता उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में निर्णायक साबित होगी। वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी की IBCD 2026 कॉन्फ्रेंस रिसर्चर्स और युवा स्कॉलर्स के लिए इन संभावनाओं को तलाशने व देश की वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति में योगदान देने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई है।”
गेस्ट ऑफ ऑनर प्रो. नीतेश पुरोहित ने भारत के इतिहास का अध्ययन करने के महत्व पर बल दिया और साइंस व टेक्नोलॉजी में इसके समृद्ध इतिहास को रेखांकित किया, जिस पर मुख्यधारा की शिक्षा में अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है। “वास्तविक दुनिया की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग विषयों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता है। बिजनेस इंटेलिजेंस, कम्प्यूटेशनल मैथमेटिक्स और डेटा एनालिटिक्स समस्याओं को समझने, साक्ष्यों का मूल्यांकन करने और प्रभावी समाधान विकसित करने के लिए एक-दूसरे के पूरक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। IBCD 2026 जैसे प्लेटफॉर्म्स रिसर्चर्स और स्टूडेंट्स को विचारों का आदान-प्रदान करने, पारंपरिक तरीकों को चुनौती देने और ऐसा रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं जो अकादमिक रूप से उत्कृष्ट होने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी हो।” प्रो. पुरोहित ने इस अवसर पर वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. सतीश कुमार मोढ़ ने कहा, “वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में हम एक ऐसा रिसर्च एनवायरनमेंट तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो इंटरडिसिप्लिनरी थिंकिंग, इनोवेशन और सार्थक अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दे। IBCD 2026 को मिली प्रतिक्रिया—जो रिसर्च सबमिशन, प्रेजेंटेशन्स और पब्लिकेशन के लिए स्वीकृत पेपर्स की संख्या में झलकती है—यह दर्शाती है कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स का कितना मूल्य है जहाँ विद्वान नए विचारों से जुड़ सकें और अपने काम को एक व्यापक अकादमिक कम्युनिटी के साथ साझा कर सकें। हमें उम्मीद है कि यह कॉन्फ्रेंस नए सहयोगों और ऐसे रिसर्च को जन्म देगी जो साइंस, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की जटिल चुनौतियों का समाधान करे।” प्रो. मोढ़ ने जनरल सिस्टम्स थ्योरी से बोल्डिंग के सिस्टम्स के पदानुक्रम का परिचय दिया और इसके सभी नौ स्तरों की व्याख्या की। उन्होंने इंडियन नॉलेज सिस्टम के महत्व पर भी जोर दिया।
अकादमिक प्रोग्राम में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रोफेसर डॉ. चिरंजीव कुमार और आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार पांडे के प्लेनरी टॉक्स शामिल रहे। की-नोट एड्रेस एसवीएनआईटी सूरत की डॉ. नीरू आदलखा द्वारा दिया गया और आईआईटी इंदौर, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), एमएएनआईटी भोपाल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, एनआईटी गोवा, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी और जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सहित प्रमुख संस्थानों के एक्सपर्ट्स द्वारा इनवाइटेड लेक्चर्स दिए गए।
दो दिनों के दौरान समानांतर ट्रैक्स में टेक्निकल सेशंस आयोजित किए गए, जिनमें बिजनेस इंटेलिजेंस, कम्प्यूटेशनल मैथमेटिक्स, डेटा एनालिटिक्स और उनके एप्लिकेशन्स को शामिल किया गया। एमएएनआईटी भोपाल, आईआईएसईआर भोपाल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, आईआईटी बीएचयू, एसवीएनआईटी सूरत, आईआईटी इंदौर और वीआईटी भोपाल जैसे संस्थानों के एक्सपर्ट्स ने सेशंस की अध्यक्षता की और वर्तमान रिसर्च व उभरती अकादमिक दिशाओं पर चर्चा में योगदान दिया। कॉन्फ्रेंस में विदेशी प्रतिभागियों द्वारा कुल 12 ऑनलाइन प्रेजेंटेशन्स दी गईं।
कॉन्फ्रेंस ने औपचारिक सेशंस से परे संवाद को भी सुगम बनाया, जिसमें इनॉग्रल सेरेमनी के बाद चीफ गेस्ट और वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर्स के बीच एक विशेष चर्चा शामिल थी।
आज कॉन्फ्रेंस संपन्न हुई, जिसमें उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। एमएएनआईटी भोपाल के प्रोफेसर (रिटायर्ड) डॉ. के.आर. परदासानी ने सेशन में गेस्ट के रूप में शिरकत की। उनके अभिनव दृष्टिकोण और रिसर्च एक्सीलेंस के लिए “यंग साइंटिस्ट” और “बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन” अवॉर्ड्स प्रदान किए गए। डॉ. अक्षरा मकरारिया के नेतृत्व वाली ऑर्गेनाइजिंग कमेटी ने कॉन्फ्रेंस की सफलता में योगदान देने के लिए सभी पार्टिसिपेंट्स, स्पीकर्स, सेशन चेयर्स, स्पॉन्सर्स और वॉलंटियर्स का आभार व्यक्त किया।
स्प्रिंगर के साथ पब्लिकेशन के लिए स्वीकार किए गए 46 रिसर्च पेपर्स के साथ, IBCD 2026 भाग लेने वाले रिसर्च कम्युनिटी के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि बनकर उभरा है। इस कॉन्फ्रेंस ने वास्तविक दुनिया की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए डेटा-ड्रिवन अप्रोच को आगे बढ़ाने में एकेडेमिया, इंडस्ट्री और गवर्नमेंट रिसर्च ऑर्गनाइजेशंस के बीच इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।





