टाटा ने सरकार से AIR INDIA परचेज एग्रीमेंट पर किए हस्ताक्षर

मुंबई
केन्द्र सरकार ने टाटा संस के साथ राष्ट्रीय विमानन कंपनी AIR INDIA की बिक्री के लिए 18,000 करोड़ रुपये के एक शेयर खरीद समझौते । इसके साथ ही अब एयर इंडिया पर टाटा सन्स का मालिकाना हक तय हो गया है। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की इकाई टैलेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 2,700 करोड़ रुपये का नकद भुगतान करने और एयरलाइन के कुल कर्ज के 15,300 करोड़ रुपये से अधिक की जिम्मेदारी लेने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। इस प्रस्ताव के तहत सरकार को एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी थी। शेयर परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के बाद एयर इंडिया के 100 फीसदी शेयर पर टाटा सन्स का अधिकार होगा।

क्या होता है शेयर परचेज एग्रीमेंट

शेयर परचेस एग्रीमेंट बेचने और खरीदने वाले के बीच एक कानूनी अनुबंध (समझौता ) होता है। इस एग्रीमेंट में कीमत के साथ खरीदने-बेचने की पूरी जानकारी दी जाती है। यह समझौता बिक्री को दर्शाता है और इसकी शर्तों पर पारस्परिक रूप से सहमति की पुष्टि करता है। इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने सॉल्ट-टू-सॉफ्टवेयर समूह की होल्डिंग कंपनी टैलेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 2,700 करोड़ रुपये कैश भुगतान करने और एयरलाइंस के कर्ज के 15,300 करोड़ रुपये से अधिक लेने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।

 

डील में क्या-क्या है शामिल?

इस डील में एयर इंडिया एक्सप्रेस और ग्राउंड हैंडलिंग आर्म एआईएसएटीएस की बिक्री भी शामिल है। साल 2003-04 के बाद यह पहला निजीकरण है। एयर इंडिया घरेलू हवाई अड्डों पर 4,480 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2,738 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट रखती है। साथ ही विदेशी हवाई अड्डों पर पार्किंंग के कंपनी के पास करीब 900 स्लॉट हैं। वहीं, एअर इंडिया की सब्सिडियरी Air India Express हर हफ्ते 665 उड़ानों का संचालन करती है।

टाटा संस के पास एयर इंडिया को वापस आने में कुल 68 साल लग गए। एयर इंडिया की स्थापना 1932 में टाटा एयर सर्विसेज के तौर पर हुई थी, जिसका नाम बाद में बदलकर टाटा एयरलाइंस कर दिया गया था। साल 1953 में भारत सरकार ने टाटा संस से एयर इंडिया में मालिकाना हक खरीद लिया था। 8 जून 1962 को एयरलाइन के नाम को आधिकारिक तौर पर एयर इंडिया कर दिया गया। और 11 जून 1962 को एयर इंडिया दुनिया की पहली ऑल जेट एयरलाइन बन गई।