स्वच्छता रैंकिग में गुरुग्राम को मिला 24वां स्थान, 39 रैंक का हुआ सुधार 

गुरुग्राम
केंद्र सरकार ने शनिवार को वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के नतीजे जारी कर दिए। एक से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की रैंकिंग में गुरुग्राम को 24वां स्थान मिला है, जबकि पिछले साल इसे 62वां स्थान मिला था। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में जिले ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2019 में शहर को 83वीं रैंक मिली थी। हालांकि, निगम अधिकारियों का स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को टॉप-10 की सूची में लाने का दावा एक बार फिर हवा हवाई साबित हुआ है। पिछले पांच वर्ष से केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण प्रतिस्पर्धा करवाई जा रही है। इसमें हर बार गुरुग्राम भी हिस्सा लेता है। गुरुग्राम नगर निगम की ओर से हर वर्ष देश के टॉप-10 सूची में शामिल होने का दावा किया जाता है, लेकिन करोड़ों का सालाना बजट होने के बाद भी शहर पांच वर्षों में देश के 50 शहर की सूची में भी शामिल नहीं हो सका है। हालांकि, पांच वर्ष से लगातार रैंकिंग में सुधार हो रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2016 में 73 शहरों को शामिल किया गया था। शहर को 2017 के सर्वेक्षण में 112 रैंकिंग, 2018 में 105 रैंकिंग, 2019 में 83 और 2020 में 62 रैंकिंग मिली थी। इस बार 24वी रैंक मिला है यानी 39 रैंक का सुधार हुआ है।

इंदौर लगातार पांचवी बार सबसे स्वच्छ शहर घोषित
केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को लगातार पांचवीं बार सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया। वार्षिक स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार 2021 के परिणामों की घोषणा शनिवार को की गई। स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार 2021 में सबसे स्वच्छ शहरों में दूसरा स्थान सूरत को और तीसरा स्थान विजयवाड़ा को प्राप्त हुआ।  आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा घोषित सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ को भारत का सबसे स्वच्छ राज्य घोषित किया गया। सर्वेक्षण में वाराणसी को ''स्वच्छ गंगा शहर'' की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और गांधी जी की इसी प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि 35 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा शहरी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त हुए हैं। कोविंद ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की सबसे बड़ी सफलता देश की सोच में बदलाव आना है जहां अब घर के छोटे बच्चे भी बड़ों को गंदगी फैलाने से रोकते और टोकते हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मनुष्य द्वारा सिर पर मैला ढोना एक शर्मनाक प्रथा है और इसे रोकने की जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं बल्कि समाज और देश के सभी नागरिकों की भी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी शहरों में मशीन से सफाई की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। राष्ट्रपति ने स्वच्छता पुरस्कार विजेता शहरों की अच्छी प्रथाओं एंव चलन को अपनाने की बात भी की।