कंगना का ‘भीख में मिली आजादी’ वाला बयान को ‘बेवकूफी’ और बचकाना: मुकेश खन्ना

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कंगना रनौत ‘भीख में मिली आजादी’ वाले बयान को लेकर काफी चर्चा में हैं। जहां, कांग्रेस नेताओं ने इस बयान को लेकर उनसे पद्मश्री वापस लेने की मांग की है। तो वहीं, तमाम भाजपा नेताओं ने भी उनके बयान से असहमति जताई है। इसी बीच अब महाभारत में भीष्म पितामाह का किरदार निभाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना भी कंगना रनौत के इस बयान पर भड़के नजर आए। उन्होंने कंगना रनौत के बयान को ‘बेवकूफी’ और बचकाना करार दिया है।

मुकेश खन्ना ने कंगना रनौत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया और कहा कि भले ही यह बयान चाटुकारिता से प्रेरित है, लेकिन इसपर हंसा जाना चाहिए। पोस्ट में उन्होंने कंगना रनौत का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी तस्वीर को साझा करते हुए मुकेश खन्ना ने लिखा, “लोग मुझसे पूछ रहे थे कि मैंने भारत की आजादी को लेकर हाल ही में दिए गए बयान पर कोई टिप्पणी क्यों नहीं की।”

मुकेश खन्ना ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “लेकिन मैंने इसपर टिप्पणी की थी। भले ही इसे न तो सुना गया हो और न ही देखा गया हो। ऐसे में मैंने सोचा कि मैं सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी करूं। मेरी नजर में यह बयान बहुत ही बचकाना और मजाकिया है। यह चाटुकारिता से भी प्रेरित है। क्या यह बयान शिक्षा में कमी दिखाने के लिए था या फिर यह पद्मश्री पुरस्कार मिलने का साइड इफेक्ट था। मुझे नहीं मालूम।”

मुकेश खन्ना ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “लेकिन हम सभी जानते हैं कि हमारा देश 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ था। इस तथ्य को बदलना कुछ और नहीं बल्कि एक बेवकूफी होगी।”

आपको बता दें कुछ दिनों पहले अपने विवादित बयान पर सफाई पेश करते हुए कंगना रनौत ने कहा था कि कोई यह बता दे कि 1947 में कौन सा स्वतंत्रता संग्राम हुआ था तो मैं पद्मश्री वापस कर दूंगी। कंगना रनौत ने यह भी कहा था कि जहां तक ​​2014 में आजादी मिलने की बात है तो मैंने विशेष रूप से कहा था कि भौतिक आजादी हमारे पास हो सकती है लेकिन भारत की चेतना और विवेक 2014 में ही आजाद हुई। एक मृत सभ्यता जीवित हो गई और अपने पंख फड़फड़ा रही है।

बता दें, कंगना के विवादित बयान पर मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने भी निशाना साधते हुए लिखा था, “इनकी बात को पूरी तरह से समझा जा सकता है। जिनका स्वाधीनता आंदोलन से कुछ लेना देना नहीं है, वह बुरा क्यों महसूस करेंगे अगर कुछ लोग इस आजादी को ‘भीख’ भी करार दें।”