ओमिक्रॉन पर काबू पाने के लिए WHO ने अलग टीम गठित की

वाशिंगटन
 कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्पेशल सेशन में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और इस महामारी को रोकने, इससे बचाव की तैयारी करने और इससे मुकाबले के लिए एक इंटरगवर्नमेंटल निगोशिएटिंग  बॉडी बनाने पर सहमति बनी, जो WHO का सम्मेलन बुलाने से लेकर इसकी रणनीति बनाने आदि की जिम्मेदारी संभालेगी। इसकी पहली बैठक 1 मार्च 2022 में होनी तय हुई है। WHO ने जोर देकर कहा कि हम एक ग्लोबल विलेज में रहते हैं, अगर ये महामारी कहीं भी फैल रही है तो सभी के लिए खतरा बरकरार है। हम आग को आधा बुझाकर शांति से नहीं बैठ सकते। संगठन ने फिर याद दिलाया कि हमारा लक्ष्य 2021 के अंत तक दुनिया की 40 फीसदी आबादी और 2022 के मध्य तक 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण करना है, लेकिन हम इसमें पिछड़ रहे हैं।

WHO ने ये भी चेतावनी दी है कि सिर्फ यात्रा प्रतिबंधों के जरिए कोविड-19 और ओमिक्रॉन वेरिएंट के प्रसार को रोकना संभव नहीं है, इसके लिए हमें व्यापक इंतजाम करने होंगे। बता दें कि दर्जनों देशों ने पहले ही यात्रा पर कड़े प्रतिबंध लगा दिये हैं, वहीं, कुछ देशों ने उड़ानें भी निलंबित कर दी हैं। लेकिन इसका प्रसार रुक नहीं रहा है। WHO ने मंगलवार को कहा कि यात्रा प्रतिबंध केवल जीवन और आजीविका पर बोझ डालेगा।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस एडनॉम घेबियस ने बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका को इस वेरिएंट का इतनी तेजी से पता लगाने और रिपोर्ट करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अन्य देशों से अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों को ध्यान में रखते हुए जोखिम-घटाने के उपाये खोजने का आग्रह किया है। इस बीच, WHO ने सलाह दी कि जो लोग अस्वस्थ हैं, जिन्हें कोविड-19 बीमारी विकसित होने का खतरा है, जिनमें 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह जैसी कॉमॉरबिडिटी वाले लोग शामिल हैं, उन्हें अपनी यात्राएं रद्द कर देनी चाहिए।