कोविड-19 वैक्सीन: रूस ने कोरोना की पहली दवा बेचने को मंजूरी दी

 मास्को  
रूस ने हल्के से मध्यम कोविड -19 संक्रमणों के लिए आर-फार्म कंपनी के कोरोनावीर उपचार को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि इस एंटी वायरल दवा को देश की फार्मेसियों में ले जाया जा सकता है। कोरोना की इस कोरोनवीर दवा की मंजूरी से मई में एक अन्य रूसी कोविड -19 दवा एविफवीर के लिए हरी झंडी मानी जा रही है। दोनों फवीपिरवीर पर आधारित हैं, जिसे जापान में विकसित किया गया था और वहां व्यापक रूप से इस वायरल के उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है।
आर-फार्म की घोषणा इस बात का एक और संकेत है कि रूस वायरस के खिलाफ दवा बनाने की वैश्विक दौड़ में बढ़त लेने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। यह पहले से ही अपने कोविड -19 परीक्षणों का निर्यात कर रहा है और इसने अपनी स्पुतनिक-वी वैक्सीन की आपूर्ति के लिए कई अंतरराष्ट्रीय सौदों का प्रबंधन किया है। कंपनी ने कहा कि उसे 168 रोगियों पर चरण- III के क्लिनिकल परीक्षण के बाद इस दवा के लिए मंजूरी मिली है। सरकारी रजिस्टर में दर्ज है कि जुलाई में कोविड -19 के उपचार के लिए अस्पताल में पहली बार इस दवा का इस्तेमाल किया गया था।

टीके के परीक्षण में कोई कोताही न बरती जाए
केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कोरोना वैक्सीन के मानव परीक्षण या नई दवा की मंजूरी और बिक्री से जुड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशानिर्देश के तहत, आईसीएमआर ने बताया है कि वैक्सीन के विकास में इन चरणों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसमें वैक्सीन के उचित स्ट्रेन की पहचान और विकास, जो सुरक्षित और प्रतिरोधी क्षमता पैदा करने वाला हो। प्री क्लीनिकल चरण में चूहों, खरगोश, गिनी पिग और हैमस्टर चाहे छोटे जानवरों पर परीक्षण किया जाए। सुरक्षा और खुराक को लेकर पर्याप्त सतर्कता बरती जाए। बड़े जानवरों में भी प्रीक्लीनिकल परीक्षण के दौरान वैक्सीन की सुरक्षा, प्रभावी क्षमता, खुराक और फार्मूलेशन पर ध्यान दिया जाए। मानव परीक्षण के पहले चरण में उत्पाद की सुरक्षा को परखा जाए। इसमें वालंटियर की संख्या 100 से कम रहती है। दूसरे चरण में देखा जाए कि वैक्सीन को लेकर प्रतिरोधी क्षमता पैदा हो रही हैं या नहीं। 

इसमें वालंटियर की संख्या एक हजार से कम होती है। तीसरे चरण के मानव परीक्षण में टीके की प्रभावी क्षमता को आंका जाना चाहिए। इसमें हजारों वालंटियर को शामिल किया जाना आवश्यक है। इनके सफल परीक्षणों के बाद नियामक की मंजूरी लेना आवश्यक है। चौथे चरण में टीके के विपणन को लेकर निगरानी करनी होगी। सीडीएससीओ ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसे टीकों के विकास के चरणों में किसी भी तरह के उल्लंघन की अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।