स्टूडेंट्स बिना सूचना 45 दिन से ज्यादा गायब रहे तो प्रवेश निरस्त

भोपाल
मध्यप्रदेश में एमडी, एमएस आयुर्वेद स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी यदि प्रवेश लेने के बाद 45 दिन से अधिक बिना सूचना अनुपस्थित रहते है तो उनका प्रवेश निरस्त किया जाएगा। निष्कासन की कार्यवाही होगी और अगले तीन साल तक उन्हें प्रदेश के किसी भी महाविद्यालय की पीजी सीटों पर प्रवेश के लिए अपात्र घोषित किया जाएगा। दंड स्वरुप उन्हें पांच लाख रुपए की राशि भी संबंधित शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में जमा कराना होगा।

आयुष विभाग ने एमडी, एमएस आयुर्वेद स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रवेश नियमों मेें इसका प्रावधान किया है। प्रवेश लेने के तीन साल तक के लिए  स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम पूर्णकालिक होंगे। पूरे अध्ययन के दौरान निजी प्रेक्टिस, अंशकालिक नौकरी या कोई अन्य नौकरी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रवेश के समय एमपी आॅनलाईन मे आवेदन के समय एवं अध्ययन के दौरान कोई तथ्य एवं जानकारी छुपाने या गलत जानकारी देने पर महाविद्यालय प्राचार्य उनके अध्ययन के दौरान कभी भी उनका प्रवेश निरस्त कर सकेंगे और प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।

महिलाओं के लिए तीस फीसदी सीटें होंगी। सेवारत अभ्यर्थी के लिए 25 फीसदी सीटें रहेंगी।  31 दिसंबर को 45 की उम्र तक के विद्यार्थी को इसमें प्रवेश दिया जाएगा। आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के रुप में पाच वर्ष नियमित सेवा करने वाले इसके लिए पात्र होंगे। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें पांच वर्ष विभाग में सेवा देने के लिए दस लाख का बांड भी भरना होगा। 85 फीसदी सीटें आॅल इंडिया स्तर पर होने वाली केन्द्रीयकृत काउंसलिंग से भरी जाएगी।

अध्ययन करने वाले को दुराचरण, आपराधिक कृत्य में संलिप्त होने, अनुशासनहीनता, लगातार बिना सूचना के 45 दिन से अधिक गायब रहने का दोषी पाये जाने पर उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। इसमें प्राचार्य महाविद्यालय से निष्कासित कर सकेंगे और विश्वविद्यालय का पंजीयन निरस्तीकरण भी किया जा सकेगा। प्रवेश निरस्तीकरण पर भी प्राचार्य निर्णय ले सकेंगे। मान्य अवकाश में इस अनुपस्थिति का समायोजन नहीं होगा। निष्कासित विद्यार्थी  निष्कासन की तिथि से तीन वर्ष के लिए राज्य के शासकीय  स्वशासी एवं निजी आयुर्वेद महाविद्यालय की पीजी सीटों पर प्रवेश के लिए अपात्र होगा। अर्थदंड के रुप में उसे पांच लाख रुपए भी कॉलेज में जमा करना होगा। राशि जमा नहीं करने पर भू राजस्व बकाया की भांति यह वसूली की जा सकेगी।  राशि जमा करने और स्टायफंड वापस करने के बाद ही अभ्यर्थी को मूल दस्तावेज वापस किए जाएंगे।